गुरुवार, 30 अप्रैल 2026

परामर्शक की कलम से....

 

‘शब्दसृष्टि’ का प्रस्तुत अंक : विलंब की वजह ....

प्रो. हसमुख परमार  

कोई भी पत्रिका, चाहे मुद्रित हो या वेब, चलती है अपने कवियों-लेखकों, पाठकों तथा मित्रों-समर्थकों के स्नेह व सहयोग के बलबूते पर, और इसकी नियमित गतिशीलता व खास गुणवत्ता का आधार होता है - संपादन-प्रकाशन प्रबंधन तथा संपादक-प्रकाशक की पारदर्शी, सुव्यवस्थित व दूरदर्शी दृष्टिऔर नीति। विगत पाँच वर्षों से अपने पथ पर अग्रसर रही ‘शब्दसृष्टि’ मासिक वेब पत्रिका के कुल 68 अंक बिल्कुल समय पर तैयार होकर अपने पाठकों की स्क्रीनपर प्रस्तुत हुए हैं, और यह संभव हुआ सर्जकों-लेखकों के लेखकीय सहयोग, पाठकों-शुभचिंतकों की सकारात्मक प्रतिक्रियाओं और संपादक-प्रकाशक की कुशलता-कर्मठता व प्रतिबद्धता के चलते। अपने जनवरी-2026 के अंक तक तो शब्दसृष्टि की गतिशीलता में कोई अवरोध नहीं आया लेकिन पिछले दो-तीन अंकों को हम नियत समय पर लगा नहीं सके, इसके लिए पाठकों, मित्रों और अपनी लेखनी के द्वारा पत्रिका का एक अभिन्न हिस्सा बनने वाले सर्जकों-समीक्षकों के निरंतर फोन आते रहे, पूछते रहें कि अंक /अंकों का क्या हुआ ? क्या शब्दसृष्टि को आपने बंद कर दिया? हमारा उत्तर था –“बंद नहीं किया। हाँ, समय पर प्रकाशित नहीं कर सके, कुछ व्यवधान हैं..... बहुत जल्द ही इसे दूर कर अंक को प्रकाशित करते हैं।”

दरअसल शब्दसृष्टि के इन अंकों के विलंब की दो-तीन वजहें थीं जिनमें मुख्य व बड़ी वजह थी कतिपय तकनीकी दिक्कतें जिसके चलते पिछले व प्रस्तुत अंक का समय पर प्रकाशन संभव नहीं हो सका।

इसमें कोई संदेह नहीं कि प्रिंट मीडिया की अपेक्षा डिजिटल पब्लिशिंग को विस्तृत वैश्विक फलक पर असंख्य पाठकों-दर्शकों तक अति शीघ्रता से पहुँचने के अवसर ज्यादा मिलते हैं, लेकिन हम इस हकीकत को भी न भूलें कि डिजिटल मंच के साथ कुछ ऐसी चुनौतियाँ भी जुड़ी हुई हैं जिसके चलते इस मंच से किसी पत्रिका या अन्य सामग्री के प्रकाशन व प्रचार-प्रसार का काम कभी-कभी बड़ा मुश्किल हो जाता है। यह बताने की जरूरत नहीं कि वेब पत्रिका को चलाने के लिए पत्रकारिता के पारंपरिक गुण-कौशल के साथ-साथ डिजिटल और तकनीकी कौशल का होना अनिवार्य है। नई तकनीकों व ट्रेंड्स के साथ चलना भी जरूरी है। कभी-कभी इस तकनीकी कुशलता के बावजूद कुछ ऐसी तकनीकी अड़चनें व खराबी आती हैं, साइबर हमले से साइट को नुकसान होता है जिससे पत्रिका का सुचारु संचालन डिस्टर्ब होता है। पिछले कुछ समय से शब्दसृष्टि के प्रकाशन में भी कुछ इस तरह की तकनीकी दिक्कतें आईं। इस वजह से पत्रिका को हम उसके निश्चित-निर्धारित समय पर प्रकाशित नहीं कर सके। बड़ी मेहनत-मशक्कत, संपादिका डॉ. पूर्वा शर्मा की सूझबूझ तथा कम्प्यूटर- इंटरनेट के कुछ विशेषज्ञों की मदद व मार्गदर्शन से हम पुनः इस पत्रिका को पहले जैसी गति प्रदान करने में सफल हुए।

शब्दसृष्टि अंक 69-70, संयुक्तांक रूप में आपके समक्ष प्रस्तुत है। साथ ही फरवरी-2026 का अंक (https://www.shabdsrishti.com/2026/02/2026-68.html) जिसे हमने फरवरी में ही लगाया था परंतु तकनीकी गड़बड़ियाँ की वजह से उस समय वह साइट/लिंक खुल नहीं रही थी, अब इसे भी दुरुस्त कर पुनः आपके ‘स्क्रीनपर प्रेषित कर रहे हैं। आपकी प्रतिक्रिया व सुझावों की प्रतीक्षा रहेगी।

अंत में, जैसे कि बताया मुख्यत: तकनीकी  कारणों से पिछले दो-तीन माह के अंकों को हम समय पर आप पाठकों तक नहीं पहुँचा सके, इसके लिए हम क्षमाप्रार्थी हैं। शब्दसृष्टि से आपका जुड़ाव बना रहे, इसी आशा के साथ ....

धन्यवाद।



प्रो. हसमुख परमार

परामर्शक-‘शब्दसृष्टि’

स्नातकोत्तर हिन्दी विभाग

सरदार पटेल विश्वविद्यालय

वल्लभ विद्यानगर

आणंद (गुजरात)

 

 

1 टिप्पणी:

  1. शब्द सृष्टि की प्रतीक्षा रहती है, तकनीकी बाधाओं से विलम्ब हुआ, कोई बात नहीं नवीन अंक पिछले अंको के साथ उपलब्ध है, हार्दिक बधाई 🌷

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मार्च-अप्रैल 2026, अंक 69-70(संयुक्तांक)

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